पहले ये समझो — notice क्यों आता है
ज़्यादातर notice रूटीन होते हैं: return में कोई मिसमैच (Form 26AS/AIS बनाम फाइल की गई इनकम), कोई डिडक्शन का प्रूफ, या साधारण वेरिफिकेशन। सिर्फ कुछ ही केस में सीरियस स्क्रूटनी होती है। इसलिए notice देख कर पहला काम — section number पढ़ो। 143(1) intimation है (ज़्यादातर कैलकुलेशन मैच), 139(9) डिफेक्टिव return है, 143(2) स्क्रूटनी है, 148 रीअसेसमेंट है। हर एक का मतलब और डेडलाइन अलग है।
सबसे ज़रूरी — टाइम लिमिट
हर notice में रिप्लाई की डेडलाइन लिखी होती है — आमतौर पर 15 से 30 दिन। डेडलाइन मिस करना ही सबसे बड़ी गलती है, क्योंकि फिर डिपार्टमेंट एकतरफा ऑर्डर पास कर सकता है। अगर टाइम कम है तो portal पर एडजर्नमेंट रिक्वेस्ट भी डाली जा सकती है।
5 गलतियां जो लोग कर देते हैं
- notice इग्नोर करना — "गलती से आ गया होगा" सोच के छोड़ देना। portal पर पड़ा notice कानूनी रूप से सर्व माना जाता है।
- बिना डॉक्यूमेंट्स के जल्दी में रिप्लाई करना — अधूरा रिप्लाई अक्सर नए सवाल खड़े करता है।
- email/SMS चेक न करना — notice अब फेसलेस हैं, सब कुछ portal और email पर आता है। रजिस्टर्ड email हमेशा एक्टिव रखें।
- गलत या बनाए हुए प्रूफ देना — यह छोटे इश्यू को बड़ा केस बना देता है। जो सच है वही फाइल करें।
- प्रोफेशनल को देर से बुलाना — पहला रिप्लाई ही केस की दिशा तय करता है। शुरुआत में ही एक्सपर्ट से ड्राफ्ट करवाना सस्ता पड़ता है।
सही प्रोसेस क्या है
Income tax portal पर लॉगिन करके e-Proceedings में notice का पूरा टेक्स्ट पढ़ें। जो डेटा डिपार्टमेंट ने कोट किया है (AIS/26AS) उसे अपने रिकॉर्ड से मिलाएं। अंतर का कारण साफ करें — डॉक्यूमेंट्स के साथ। रिप्लाई portal पर ही सबमिट होता है, एक्नॉलेजमेंट सेव रखें। अगर डिमांड गलत लगती है तो रेक्टिफिकेशन या appeal का रास्ता भी होता है — डेडलाइन के अंदर।
कब प्रोफेशनल की ज़रूरत है
साधारण 143(1) मिसमैच आप खुद भी हैंडल कर सकते हैं। लेकिन स्क्रूटनी (143(2)), रीअसेसमेंट (148), या बड़ी डिमांड हो — तो रिप्रेजेंटेशन का अनुभव मायने रखता है, क्योंकि वहां ड्राफ्टिंग के साथ-साथ हियरिंग भी होती है। हम CGA में filing से लेकर appeal तक, पूरा मामला एक ही डेस्क पर हैंडल करते हैं।
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