छोटा business
एक यूनिट, सिंपल बुक्स, बेसिक reporting
- हर महीने बुक्स की क्लोजिंग
- एक पेज का MIS
- Cash flow की समरी
- Compliance कैलेंडर पर नज़र
₹25,000 / month से शुरू · + GST
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद तय होती है
वर्चुअल सीएफओ · एडवाइजरी
बहुत से बिज़नेस इसलिए नहीं रुकते कि काम कम है। वो इसलिए रुकते हैं कि आंकड़े वक्त पर सामने नहीं आते। कौन सा प्रोडक्ट पैसा दे रहा है, कैश कहां अटका है, अगले महीने कितना चाहिए — ये हर महीने पता होना चाहिए, साल के अंत में नहीं।
काम में क्या शामिल है
फीस
फीस business के साइज, transactions और reporting की ज़रूरत पर निर्भर करती है। नीचे शुरुआती जानकारी दी गई है।
एक यूनिट, सिंपल बुक्स, बेसिक reporting
₹25,000 / month से शुरू · + GST
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद तय होती है
एक से ज़्यादा प्रोडक्ट्स या लोकेशन्स, बैंक लिमिट के साथ
₹45,000 / month से शुरू · + GST
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद तय होती है
Investor reporting, board meetings, audit की तैयारी
₹75,000 / month से शुरू · + GST
Exact fee scope देखने के बाद fix होती है
इस page पर दी गई जानकारी general information है, professional advice नहीं। Tax positions facts और उस वक्त के law पर depend करती हैं — अपने case के लिए हमसे बात कर लीजिए।
साल खत्म होने पर पता चले कि margin गिर गया तो कुछ नहीं किया जा सकता। हर महीने पता चले तो टाइम रहते सुधारा जा सकता है।
Loan, limit या funding — तीनों जगह साफ़ books, projections और documentation चाहिए। ये रात भर में तैयार नहीं होते।
Scope
एक full-time CFO जो काम करता है, वही काम — part-time engagement में।
हर महीने books बंद, ताकि numbers हमेशा ताज़ा और भरोसे के लायक रहें।
Sales, margin, खर्चा और profit — एक page पर, समझ आने वाली भाषा में।
कितना आएगा, कितना जाएगा, और किस हफ्ते कमी पड़ेगी — पहले से पता।
साल का budget, और हर महीने ये कि plan से कितना आगे-पीछे चल रहे हैं।
किसका पैसा अटका है और कितने दिन से — follow-up का system।
कौन सा product या client असली में पैसा दे रहा है, और कौन सा नहीं।
CMA data, projections और bank के सवालों का जवाब।
GST, TDS और ROC time पर जा रहे हैं या नहीं — एक जगह से नज़र।
जो report बाहर जाती है, वो साफ़ और consistent रहे।
आम दिक्कतें
ये वो चीज़ें हैं जिनके लिए business owner सबसे ज़्यादा परेशान होते हैं।
पूरा साल अंधेरे में निकल जाता है, और गलती सुधारने का time ही नहीं बचता।
पैसा आना और मुनाफ़ा होना दो अलग चीज़ें हैं।
Bank documents मांगता है और उस वक़्त सब जल्दबाज़ी में बनता है।
किसने कब देना था, ये किसी एक जगह लिखा ही नहीं होता।
दो जगह दो अलग नंबर — notice की सबसे आम वजह।
Entry हो जाती है, लेकिन उसका मतलब कोई नहीं निकलता।
प्रोसेस
अभी books, systems और numbers कहाँ खड़े हैं — एक ईमानदार तस्वीर।
Chart of accounts, reports का format और महीने का calendar तय।
Closing, MIS और cash flow — फिक्स तारीख पर।
हर महीने या quarter में numbers पर बात, और अगले कदम।
Accountant entry करता है, हम उस data का मतलब निकालते हैं। दोनों अलग काम हैं — अक्सर हम आपके ही accountant के साथ मिलकर काम करते हैं, उसको हटाते नहीं।
नहीं। काम पूरा online चलता है। हर महीने या quarter में एक बैठक होती है, वो call पर या office में — जैसा आपको ठीक लगे।
हाँ। Tally, Zoho, Busy या Excel — जो आप use करते हो उसी पर काम हो जाता है। नया software लेने की ज़रूरत नहीं।
वो अलग services हैं और उनकी fees अलग है। Virtual CFO में हम उनपर नज़र रखते हैं कि time पर जा रहे हैं या नहीं। दोनों एक साथ चाहिए तो combined plan बना देते हैं।
हर business के लिए नहीं है। अगर आपके पास कुछ ही transactions हैं तो accounting और retainer काफी है। बात करके साफ़ बता देंगे कि अभी ज़रूरत है भी या नहीं।
काम महीने के हिसाब से चलता है। इतना ज़रूर कहेंगे कि तीन-चार महीने से पहले फर्क दिखता नहीं, क्योंकि पहला महीना तो सिर्फ चीज़ें सीधी करने में जाता है।
और भी
Turnover, कितने लोग, और books अभी कैसे चलती हैं — इतना काफी है। हम बता देंगे कि Virtual CFO की ज़रूरत है भी या नहीं, और है तो कौन सा tier ठीक रहेगा। इसके लिए कोई charge नहीं।