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NRI · विदेशी इनकम · DTAA

बाहर की इनकम, इंडिया का return —
दोनों का मिलना ज़रूरी है।

पहला सवाल टैक्स का नहीं, रेजिडेंशियल स्टेटस का होता है। वही तय करता है कि इंडिया में कितनी इनकम टैक्सेबल है और कौन-कौन सी रिपोर्टिंग आप पर लगती है।

काम में क्या शामिल है

  • रेजिडेंशियल स्टेटस का फैसला
  • विदेशी सैलरी और एसेट का ट्रीटमेंट
  • Schedule FA की रिपोर्टिंग
  • DTAA रिलीफ और Form 67
  • NRO / NRE और बैंक का TDS
  • Form 15CA और Form 15CB
2,500+पूरे भारत में client
20+प्रोफेशनल और स्टाफ
4office — UP, दिल्ली, हरियाणा

फीस

काम और फीस

फॉरेन इनकम का काम डॉक्युमेंट्स पर आधारित है। लिस्ट देखने के बाद हम फीस पहले ही तय कर देते हैं।

F1

NRI का India return

सिर्फ India की इनकम — रेंट, इंटरेस्ट, कैपिटल गेन

  • Residential स्टेटस का कन्फर्मेशन
  • TDS और AIS का reconciliation
  • refund claim जहाँ TDS ज़्यादा कटा हो
  • return filing

₹5,000 से शुरू · + GST
सही फीस स्कोप देखने के बाद तय होती है

F1 के बारे में पूछिए
सबसे कॉमन
F2

फॉरेन इनकम & एसेट्स

Resident जिनकी फॉरेन सैलरी, ESOP या फॉरेन अकाउंट्स हैं

  • स्टेटस और स्कोप का निर्धारण
  • फॉरेन एसेट और फॉरेन इनकम रिपोर्टिंग
  • फॉरेन टैक्स क्रेडिट की वर्किंग और फॉर्म
  • DTAA रिलीफ का असेसमेंट
  • return filing

₹9,000 से शुरू · + GST
सही फीस स्कोप देखने के बाद तय होती है

F2 के बारे में पूछिए
F3

Property sale & repatriation

NRI property sale, lower TDS certificate, पैसा बाहर भेजना

  • Capital gain की working
  • Lower या nil deduction certificate की application
  • Remittance के forms और CA certificate
  • Bank के साथ coordination

₹15,000 से शुरू · + GST
Exact fee scope देखने के बाद fix होती है

F3 के बारे में पूछिए

इस page पर दी गयी जानकारी general information है, professional advice नहीं। Tax positions facts और उस वक़्त के law पर depend करती हैं — अपने case के लिए हमसे बात कर लीजिए।

Status पहले, tax बाद में

Resident, RNOR और non-resident — तीनों का scope अलग है। एक ही साल में status बदल सकता है, और उसी से तय होता है कि foreign income और foreign assets report करने हैं या नहीं।

Information अब अपने आप आती है

बहुत से देशों के साथ India का automatic financial information exchange होता है। यानी foreign account की जानकारी department के पास आ सकती है चाहे आपने return में ना लिखा हो — और foreign asset छूट जाने पर penalty income से कई गुना बड़ी हो सकती है।

किसे लगता है

आम तौर पर ये cases आते हैं

हर case का जवाब facts पर depend करता है — कितने दिन India में रहे, income कहां से आयी, और asset किस नाम पर है।

NRI जिनकी India में income है

Rent, FD interest, mutual fund या shares का capital gain, या property sale। Return filing करना फायदे का होता है क्योंकि TDS अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा कट जाता है।

India वापस आए हुए लोग

वापस आने पर कुछ साल RNOR status मिल सकता है, जिसमें foreign income पर treatment अलग होता है। ये window miss हो जाए तो महंगा पड़ता है।

Resident जिनकी foreign salary या ESOP है

विदेश में काम किया, या foreign parent company के RSU/ESOP मिले। Perquisite और capital gain — दोनों का अलग treatment है और double counting आम गलती है।

Foreign clients वाले freelancers

बाहर से receipts आती हैं — ये business income है, और इसके साथ export का GST treatment भी देखना पड़ता है।

Foreign bank, broker या crypto account

US brokerage, foreign bank account या foreign exchange पर holdings — resident हैं तो reporting का सवाल अलग से बनता है।

Inheritance या foreign property

बाहर की property या विरासत में मिली holding — ownership, income और reporting तीनों को साथ देखना पड़ता है।

काम

हम क्या करते हैं

काम का order हमेशा एक ही रहता है — पहले status, फिर income की mapping, फिर relief, फिर filing।

Residential status का determination

दिन गिनने से लेकर special rules तक — लिखित में बता देते हैं कि उस साल आप किस status में हैं और उसका मतलब क्या है।

Foreign income और asset reporting

Return के foreign asset और foreign source income वाले schedules, statement के साथ tally किए हुए। यही वो हिस्सा है जहाँ गलती सबसे महंगी पड़ती है।

Foreign tax credit

बाहर चुका हुआ tax India में credit हो सकता है, लेकिन उसके लिए अलग form और documents चाहिए होते हैं, और वो return से पहले का काम है।

DTAA के तहत relief

Treaty का फ़ायदा लेने के लिए Tax Residency Certificate और declaration चाहिए। कौन सा article लगेगा, ये income के type पर depend करता है।

NRI property sale का TDS

NRI से property खरीदने पर TDS का rate अलग होता है। सही case में lower या nil deduction certificate से पैसा block होने से बच जाता है।

Repatriation का documentation

पैसा बाहर भेजने के लिए CA certificate और forms — bank इन्हीं के बिना remittance process नहीं करता।

Process

Process

1

Facts

Passport stamps या travel dates, income sources और accounts की list। इसी से status निकलता है।

2

मैपिंग

कौन सी income India में taxable है, कौन सी नहीं, और क्या-क्या report करना है।

3

Relief

Treaty और foreign tax credit — जो claim बन सकता है वो पहले तय, ताकि documents time पर आ जाएं।

4

Filing

Return file, और पूरी working आपके पास — ताकि कभी query आए तो जवाब ready हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं NRI हूं और India में सिर्फ FD interest है — return file करना ज़रूरी है?

कई बार ज़रूरी नहीं होता, लेकिन फिर भी फ़ायदा होता है। NRI के interest पर TDS अक्सर आपकी actual liability से ज़्यादा कट जाता है, और वो extra सिर्फ return file करने पर ही वापस मिलता है।

Foreign account छोटा है, फिर भी बताना पड़ेगा?

Reporting का सवाल amount से पहले status से जुड़ता है। छोटे balance के लिए भी disclosure का rule हो सकता है, और न बताने का नतीजा tax से कहीं बड़ा होता है। इसलिए हम इसे हमेशा check करते हैं, छोड़ देने की सलाह नहीं देते।

बाहर भी tax दिया है, क्या India में दोबारा देना पड़ेगा?

आम तौर पर नहीं — treaty और foreign tax credit के ज़रिए relief मिलता है। लेकिन credit के लिए documents और form return से पहले चाहिए होते हैं, इसलिए planning last date पर नहीं हो सकती।

कितने दिन India में रहे तो resident बन जाते हैं?

एक fix number सबके लिए नहीं चलता — Indian citizens, foreign employment और income के level के हिसाब से अलग rules हैं। आप अपने travel dates भेज दीजिए, हम उस साल का status लिखित में बता देंगे।

पिछले साल foreign income declare नहीं की, अब क्या करें?

ये ठीक करने लायक चीज़ है, और जितना जल्दी हो उतना बेहतर। कौन सा रास्ता available है वो साल और amount पर depend करता है — हम पहले exposure देख कर options बताते हैं।

आप FEMA का side भी देखते हैं?

हां, tax के साथ जितना ज़रूरी है उतना — remittance limits, account type और reporting। हर case में दोनों side एक साथ देखना पड़ता है।

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अपना केस एक लाइन में बता दीजिए

कितने दिन इंडिया में रहे, इनकम कहाँ से आती है, और कौन से अकाउंट्स बाहर हैं — इतने से हम बता देंगे कि आप पर क्या लगता है। इसके लिए कोई चार्ज नहीं।

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AarzooCGA India असिस्टेंट · ऑनलाइन