partnerशिप फर्म
दो या ज़्यादा partner, आसान स्ट्रक्चर
- Deed ड्राफ्टिंग
- स्टैम्प और नोटरी की सलाह
- फर्म registration जहाँ लागू हो
- PAN और बैंक के डाक्यूमेंट्स
₹4,000 से शुरू · + GST
पूरी फीस काम का दायरा देखने के बाद तय होती है
फर्म और LLP · LLP Act, 2008
ज़्यादातर पार्टनरशिप तब टूटती है जब प्रॉफिट शेयरिंग, exit और ज़िम्मेदारी कागज़ पर साफ़ नहीं होती। Deed सिर्फ registration का डॉक्यूमेंट नहीं है — वो आपका झगड़ा रोकने वाला डॉक्यूमेंट है।
काम में क्या शामिल है
फीस
नीचे हमारी प्रोफेशनल फीस दी गई है। सरकारी फीस और स्टैम्प ड्यूटी अलग से लगती है और राज्य के हिसाब से बदलती है।
दो या ज़्यादा partner, आसान स्ट्रक्चर
₹4,000 से शुरू · + GST
पूरी फीस काम का दायरा देखने के बाद तय होती है
सीमित ज़िम्मेदारी चाहिए, client बड़े हैं
₹8,000 से शुरू · + GST
पूरी फीस काम का दायरा देखने के बाद तय होती है
नयी LLP जिसे compliance का झंझट नहीं चाहिए
₹18,000 से शुरू · + GST
Exact fee scope देखने के बाद fix होती है
इस पेज पर दी गयी जानकारी general information है, professional advice नहीं। Tax positions facts और उस वक़्त के law पर depend करती हैं — अपने case के लिए हमसे बात कर लीजिए।
Normal partnership में partner की personal ज़िम्मेदारी खुली रहती है। LLP में वो सीमित होती है, और इसी वजह से बड़े clients LLP पसंद करते हैं।
Profit ratio, capital, निकलने का तरीका और नए partner का आना — जो लिखा होगा वही चलेगा, बाकी सब बातें रह जाती हैं।
Scope
आप किस तरह का structure चाहते हैं, उसके हिसाब से काम अलग है।
Capital, profit ratio, काम का बंटवारा, exit और dispute — सब लिखित में।
Registrar of Firms के पास registration, जहाँ state में वो होता है।
Name approval, DSC और DIN, FiLLiP filing और incorporation certificate।
Incorporation के बाद का ज़रूरी agreement और उसकी filing।
Firm या LLP के नाम पर PAN, TAN और bank account के documents।
Admission, retirement या profit ratio बदलना — deed और filing दोनों।
Statement of accounts और annual return, हर साल।
Firm से LLP, या LLP से company — जब business बड़ा हो जाए।
काम बंद करना हो तो सही तरीके से बंद करना, वरना filings चलती रहती हैं।
आम दिक्कतें
ये वो चीज़ें हैं जो partnership में सबसे ज़्यादा दिक्कत देती हैं।
काम बदल गया, partner बदल गए, लेकिन deed वही सालों पुरानी।
Exit का तरीका लिखा ही नहीं था, अब हर बात पर बहस है।
LLP में late filing का असर रोज़ के हिसाब से बढ़ता है, चाहे business बंद हो।
Deed या registration के documents bank की requirement से match नहीं कर रहे।
registration नहीं है तो कई जगह फर्म का केस ही नहीं बनता।
फंडिंग लेनी हो तो स्ट्रक्चर अलग होता है, सिर्फ compliance देख कर फैसला नहीं होता।
प्रोसेस
कितने partner, क्या कैपिटल और काम का बंटवारा — स्ट्रक्चर यहीं तय होता है।
Deed या agreement का ड्राफ्ट, आपके रिव्यू के लिए।
filing, फीस और डिपार्टमेंट का फॉलो-अप।
सर्टिफिकेट, PAN, TAN और आगे का compliance कैलेंडर।
काम बिना registration के भी चल जाता है, लेकिन registration न होने पर कोर्ट में फर्म के अपने हक कम हो जाते हैं। इसलिए हम registration की ही सलाह देते हैं।
इन्वेस्टर से फंडिंग लेनी हो तो Pvt Ltd ही रास्ता होता है। दो-तीन लोग अपना काम चला रहे हैं और compliance हल्का चाहिए तो LLP अक्सर बेहतर रहती है। हमने इसका कंपैरिजन अलग से लिखा है।
वो टर्नओवर और कैपिटल पर डिपेंड करता है, सब LLP में नहीं। आप अपने नंबर्स बता दीजिए, हम साफ़ बता देंगे।
हाँ। बिजनेस चले या न चले, LLP की सालाना filing चलती रहती है और देरी का असर रोज़ बढ़ता है। ऐसी LLP को ठीक करने या बंद करने, दोनों का रास्ता है।
Deed या agreement में बदलाव और उसकी filing। कैपिटल और प्रॉफिट रेशियो भी उसी में साफ़ लिखा जाता है।
हाँ, conversion का प्रोसेस है। आप अपनी current firm की detail भेज दीजिए, हम देखकर रास्ता बता देंगे।
और भी
काम क्या है, कितने लोग हैं और ज़िम्मेदारी कैसे बाँटनी है — इतना काफी है। हम बता देंगे कि firm ठीक रहेगी या LLP, और total क्या लगेगा। इसके लिए कोई charge नहीं।