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फर्म और LLP · LLP Act, 2008

partner के साथ काम शुरू करना आसान है —
लिखित में करना ज़रूरी है।

ज़्यादातर पार्टनरशिप तब टूटती है जब प्रॉफिट शेयरिंग, exit और ज़िम्मेदारी कागज़ पर साफ़ नहीं होती। Deed सिर्फ registration का डॉक्यूमेंट नहीं है — वो आपका झगड़ा रोकने वाला डॉक्यूमेंट है।

काम में क्या शामिल है

  • पार्टनरशिप डीड की ड्राफ्टिंग
  • कैपिटल, प्रॉफिट रेशियो और exit की शर्तें
  • Registrar of Firms के पास registration
  • LLP incorporation और LLP agreement
  • Partner का आना या जाना
  • Annual filings — Form 8 और Form 11
2,500+पूरे भारत में clients
20+Professionals और staff
4Offices — UP, Delhi, Haryana

फीस

काम और फीस

नीचे हमारी प्रोफेशनल फीस दी गई है। सरकारी फीस और स्टैम्प ड्यूटी अलग से लगती है और राज्य के हिसाब से बदलती है।

LP1

partnerशिप फर्म

दो या ज़्यादा partner, आसान स्ट्रक्चर

  • Deed ड्राफ्टिंग
  • स्टैम्प और नोटरी की सलाह
  • फर्म registration जहाँ लागू हो
  • PAN और बैंक के डाक्यूमेंट्स

₹4,000 से शुरू · + GST
पूरी फीस काम का दायरा देखने के बाद तय होती है

LP1 के बारे में पूछिए
सबसे कॉमन
LP2

LLP incorporation

सीमित ज़िम्मेदारी चाहिए, client बड़े हैं

  • नाम का अप्रूवल
  • partner के DSC और DIN
  • FiLLiP filing और सर्टिफिकेट
  • LLP एग्रीमेंट और उसकी filing
  • PAN और TAN

₹8,000 से शुरू · + GST
पूरी फीस काम का दायरा देखने के बाद तय होती है

LP2 के बारे में पूछिए
LP3

LLP + पहला साल

नयी LLP जिसे compliance का झंझट नहीं चाहिए

  • LP2 का पूरा scope
  • Books और accounting का setup
  • पहले साल की annual filings
  • Partners की KYC
  • Compliance calendar और reminders

₹18,000 से शुरू · + GST
Exact fee scope देखने के बाद fix होती है

LP3 के बारे में पूछिए

इस पेज पर दी गयी जानकारी general information है, professional advice नहीं। Tax positions facts और उस वक़्त के law पर depend करती हैं — अपने case के लिए हमसे बात कर लीजिए।

LLP में ज़िम्मेदारी सीमित रहती है

Normal partnership में partner की personal ज़िम्मेदारी खुली रहती है। LLP में वो सीमित होती है, और इसी वजह से बड़े clients LLP पसंद करते हैं।

Deed का draft बाद में सबसे काम आता है

Profit ratio, capital, निकलने का तरीका और नए partner का आना — जो लिखा होगा वही चलेगा, बाकी सब बातें रह जाती हैं।

Scope

क्या-क्या cover होता है

आप किस तरह का structure चाहते हैं, उसके हिसाब से काम अलग है।

Partnership deed drafting

Capital, profit ratio, काम का बंटवारा, exit और dispute — सब लिखित में।

Firm registration

Registrar of Firms के पास registration, जहाँ state में वो होता है।

LLP incorporation

Name approval, DSC और DIN, FiLLiP filing और incorporation certificate।

LLP agreement

Incorporation के बाद का ज़रूरी agreement और उसकी filing।

PAN, TAN और bank

Firm या LLP के नाम पर PAN, TAN और bank account के documents।

Partner का आना या जाना

Admission, retirement या profit ratio बदलना — deed और filing दोनों।

LLP की annual filings

Statement of accounts और annual return, हर साल।

Conversion

Firm से LLP, या LLP से company — जब business बड़ा हो जाए।

Closure

काम बंद करना हो तो सही तरीके से बंद करना, वरना filings चलती रहती हैं।

आम दिक्कतें

इन चीज़ों पर सबसे ज़्यादा सवाल आते हैं

ये वो चीज़ें हैं जो partnership में सबसे ज़्यादा दिक्कत देती हैं।

Deed पुरानी है

काम बदल गया, partner बदल गए, लेकिन deed वही सालों पुरानी।

Partner निकलना चाहता है

Exit का तरीका लिखा ही नहीं था, अब हर बात पर बहस है।

LLP की filings pending हैं

LLP में late filing का असर रोज़ के हिसाब से बढ़ता है, चाहे business बंद हो।

Bank account नहीं खुल रहा

Deed या registration के documents bank की requirement से match नहीं कर रहे।

Firm के नाम पर property या loan

registration नहीं है तो कई जगह फर्म का केस ही नहीं बनता।

LLP या Pvt Ltd का कन्फ्यूजन

फंडिंग लेनी हो तो स्ट्रक्चर अलग होता है, सिर्फ compliance देख कर फैसला नहीं होता।

प्रोसेस

कैसे चलता है

1

बात

कितने partner, क्या कैपिटल और काम का बंटवारा — स्ट्रक्चर यहीं तय होता है।

2

ड्राफ्ट

Deed या agreement का ड्राफ्ट, आपके रिव्यू के लिए।

3

registration

filing, फीस और डिपार्टमेंट का फॉलो-अप।

4

हैंडओवर

सर्टिफिकेट, PAN, TAN और आगे का compliance कैलेंडर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पार्टनरशिप registration कराना ज़रूरी है?

काम बिना registration के भी चल जाता है, लेकिन registration न होने पर कोर्ट में फर्म के अपने हक कम हो जाते हैं। इसलिए हम registration की ही सलाह देते हैं।

LLP लें या Pvt Ltd?

इन्वेस्टर से फंडिंग लेनी हो तो Pvt Ltd ही रास्ता होता है। दो-तीन लोग अपना काम चला रहे हैं और compliance हल्का चाहिए तो LLP अक्सर बेहतर रहती है। हमने इसका कंपैरिजन अलग से लिखा है।

LLP में audit होता है?

वो टर्नओवर और कैपिटल पर डिपेंड करता है, सब LLP में नहीं। आप अपने नंबर्स बता दीजिए, हम साफ़ बता देंगे।

LLP बना कर छोड़ दी, कुछ काम नहीं किया — filing करनी पड़ेगी?

हाँ। बिजनेस चले या न चले, LLP की सालाना filing चलती रहती है और देरी का असर रोज़ बढ़ता है। ऐसी LLP को ठीक करने या बंद करने, दोनों का रास्ता है।

नया partner लेना है, क्या करना होगा?

Deed या agreement में बदलाव और उसकी filing। कैपिटल और प्रॉफिट रेशियो भी उसी में साफ़ लिखा जाता है।

फर्म को LLP में कन्वर्ट कर सकते हैं?

हाँ, conversion का प्रोसेस है। आप अपनी current firm की detail भेज दीजिए, हम देखकर रास्ता बता देंगे।

और भी

जुड़ी हुई services

Pvt Ltd vs LLP

Comparison विस्तार में

Pvt Ltd registration

company बनानी हो तो

सालाना compliance

हर साल की filing

कितने partner हैं, बस इतना बता दीजिए

काम क्या है, कितने लोग हैं और ज़िम्मेदारी कैसे बाँटनी है — इतना काफी है। हम बता देंगे कि firm ठीक रहेगी या LLP, और total क्या लगेगा। इसके लिए कोई charge नहीं।

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आरज़ूCGA India असिस्टेंट · ऑनलाइन