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मैन्युफैक्चरिंग · फैक्ट्री

फैक्ट्री चल रही है —
कंप्लायंस भी उसी स्पीड से चलनी चाहिए।

मैन्युफैक्चरिंग में कंप्लायंस सिर्फ return filing नहीं है। इनपुट, जॉब वर्क, मूवमेंट, लेबर और पेमेंट की शर्तें — सब एक चेन है, और एक कड़ी टूटने पर प्रोडक्शन रुक जाता है।

काम में क्या शामिल है

  • GST और इनपुट क्रेडिट का हिसाब
  • जॉब वर्क और ITC-04
  • E-way bill और e-invoice
  • MSME पेमेंट नियम का असर
  • Factory और labour compliance
  • Cost records और audit
2,500+पूरे भारत में client
20+Professionals और स्टाफ
4office — UP, दिल्ली, हरियाणा

फीस

काम और फीस

मैन्युफैक्चरिंग का काम हर महीने का होता है, इसलिए ज़्यादातर यूनिट्स रिटेनर पर चलती हैं। एक बार का हेल्थ चेक अलग से भी करा सकते हैं।

M1

कम्प्लायंस हेल्थ चेक

एक बार का रिव्यू — नए client या नए सेटअप के लिए

  • GST, TDS और ROC का स्टेटस रिव्यू
  • जॉब वर्क और स्टॉक रिकॉर्ड्स का चेक
  • registration और licence की लिस्ट
  • लिखित गैप रिपोर्ट प्रायोरिटी के साथ

₹7,500 से शुरू · + GST · वन-टाइम
सटीक फीस स्कोप देखने के बाद तय होती है

हेल्थ चेक बुक करिए
सबसे कॉमन
M2

मंथली रिटेनर — SME यूनिट

चलती हुई यूनिट, रेगुलर GST और पेरोल

  • मंथली GST return और ITC रिकॉन्सिलिएशन
  • TDS return और चालान
  • जॉब वर्क रजिस्टर और ITC-04
  • पेरोल, PF और ESI
  • कम्प्लायंस कैलेंडर और रिमाइंडर्स
  • पूरा स्कोप रिटेनर पेज पर

₹12,500 / month से शुरू · + GST
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद तय होती है

Retainer के बारे में पूछिए
M3

Corporate / multi-unit

एक से ज़्यादा units या states, cost audit लागू

  • Multi-state GST और unit-wise reconciliation
  • Cost records और cost audit सपोर्ट
  • Statutory और internal audit तालमेल
  • ROC और board compliance
  • Management के लिए monthly compliance dashboard

₹30,000 / month से शुरू · + GST
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद तय होती है

M3 के बारे में पूछिए

इस पेज पर दी गई जानकारी सामान्य जानकारी है, प्रोफेशनल सलाह नहीं। टैक्स की स्थिति तथ्यों और उस समय के कानून पर निर्भर करती है — अपने केस के लिए हमसे बात कर लीजिए।

Trading और manufacturing का compliance अलग है

यहाँ स्टॉक, job work, बर्बादी, capital goods और आने-जाने वाला ट्रांसपोर्ट — सब GST रिकॉर्ड से जुड़े होते हैं। साधारण bookkeeping से यह नहीं चलता, और audit के समय यही कमियां निकलती हैं।

चूक महंगी पड़ती है

E-way bill में गलती पर गाड़ी सड़क पर रोक ली जाती है। Supplier ने return नहीं भरा तो आपका ITC अटक जाता है। दोनों मामलों में नुकसान प्रोडक्शन का होता है, सिर्फ टैक्स का नहीं।

Scope

क्या-क्या कवर होता है

ज़्यादातर units को हर चीज़ की ज़रूरत नहीं होती। पहले देखते हैं आपके सेटअप में क्या लागू होता है, फिर उसी का scope बनाते हैं।

GST और input tax credit

Monthly returns, इनपुट और capital goods पर ITC, blocked credits का रिव्यू, और inverted duty structure वाली units के लिए refund क्लेम।

Job work

Job worker को भेजा गया material, वापस आने की timeline, और ITC-04 की reporting। Time limit निकलने पर वो supply मान लिया जाता है — यही सबसे common miss है।

E-invoicing और e-way bill

Turnover के हिसाब से e-invoicing applicability, e-way bill का सही generation, और detention या penalty की सूरत में representation।

TDS और TCS on purchases

बड़े purchases पर TDS u/s 194Q और sales पर TCS u/s 206C(1H) — दोनों एक साथ नहीं लगते। कौन काटेगा, ये पहले तय करना सस्ता पड़ता है।

MSME का 45-दिन वाला rule

Micro और small suppliers को time पर payment न हो तो उस खर्च की deduction उसी साल नहीं मिलती। Vendor master को Udyam status के साथ tag करना ज़रूरी हो गया है।

Factory और labour

Factory licence, PF, ESI, contractor compliance और registers। Inspection के वक्त यही records मांगे जाते हैं।

Cost records और cost audit

कई manufacturing sectors में cost records रखना और limit cross होने पर cost audit compulsory है। हमारे पास CMA support in-house है।

Import, export और incentives

IEC, customs documentation, export benefits और state industrial policy के incentives — eligibility और claim का process।

ROC और annual filings

Board के resolutions, registers, annual return और financial statements — साल भर का calendar एक जगह।

Common gaps

Health check में सबसे ज़्यादा क्या निकलता है

ये वो चीज़ें हैं जो हम नयी units में बार-बार देखते हैं। इनमें से एक भी लग रही हो तो check करवाना फ़ायदे का रहता है।

Books और GST returns match नहीं करते

Turnover, ITC और stock — तीनों जगह अलग figures। ये annual return के वक्त ही पकड़ा जाता है, जब reply करने का time कम होता है।

Job work का register ही नहीं है

Material बाहर गया, वापस कब आया इसका record नहीं। बिना register के time limit prove करना मुश्किल हो जाता है।

Vendors की MSME status पता नहीं

Purchase ledger में ये field ही नहीं होता, इसलिए 45-दिन का rule track ही नहीं होता।

Capital goods का ITC treatment

Machinery पर claim तो ले लिया, लेकिन depreciation में भी वही amount चला गया — दोनों एक साथ नहीं हो सकते।

Contractor labour का रिकॉर्ड अधूरा

Principal employer की ज़िम्मेदारी रहती है, चाहे labour contractor के थ्रू हो।

Scrap और wastage का हिसाब नहीं

Scrap sale का GST treatment छूट जाता है, और wastage का percentage justify नहीं हो पाता।

Process

कैसे शुरू करते हैं

1

Health check

एक बार registrations, returns और records देख कर लिखित gap list बनाते हैं।

2

Priority

कौन सा gap पैसा या penalty बचा रहा है — उसको पहले। बाकी को timeline पर।

3

Fix

Pending filings, registers और corrections पूरे करते हैं, आपके team के साथ।

4

Monthly

उसके बाद monthly retainer पर चलता है — calendar हमारा, production आपका।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हमारे पास already accountant है, फिर आपकी ज़रूरत क्या है?

बहुत units में accountant entries ठीक करता है, लेकिन job work timelines, ITC eligibility और cost records जैसी चीज़ें अलग expertise मांगती हैं। कई clients अपना accounting in-house रखते हैं और सिर्फ review, returns और representation हमें देते हैं।

Job work का material वापस नहीं आया तो क्या होता है?

निर्धारित time limit के बाद वो movement supply मानी जाती है और उस पर tax की demand बन सकती है। इसलिए register और ITC-04 time पर रखना ही असली बचाव है।

Inverted duty structure में refund मिलता है?

कई cases में हाँ — जब input का rate output से ज़्यादा हो। Eligibility और amount आपके item के rate structure पर depend करती है; हम पहले calculate कर के बताते हैं कि claim बनता है या नहीं।

MSME वाला 45-दिन का rule हमपे लगता है?

अगर आपके supplier micro या small enterprise हैं तो हाँ — उन्हें time पर payment ना होने पर उस खर्च की deduction उसी साल नहीं मिलती। इसलिए vendor master में Udyam number capture करना सबसे पहला step है।

दूसरे राज्य में यूनिट है, चलेगा?

हाँ। Multi-state GST नियमित रूप से हैंडल करते हैं। Documents ऑनलाइन, बात कॉल पर — PAN India काम होता है।

पुरानी पेंडिंग filings बहुत हैं, आप लेंगे?

हाँ। पहले एक हेल्थ चेक करते हैं ताकि रिस्क साफ हो, फिर प्रायोरिटी के हिसाब से क्लियर करते हैं। कितना समय और कितनी फीस — दोनों पहले लिखित में बता देते हैं।

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एक बार अपनी यूनिट का सेटअप बता दीजिए

registration, टर्नओवर और अभी कौन-कौन सी filings पेंडिंग हैं — इतना काफी है। हम बता देंगे कि क्या रिस्क है और काम कितना है। इसके लिए कोई चार्ज नहीं।

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