छोटी टीम
लगभग 10 कर्मचारियों तक, एक राज्य
- मौजूदा स्ट्रक्चर का audit
- कॉस्ट इम्पैक्ट की वर्किंग
- नया ग्रेड-वाइज़ ब्रेकअप
- CTC शीट का फॉर्मेट
₹10,000 से शुरू · + GST · वन-टाइम
सही फीस काम का स्कोप देखने के बाद तय होती है
लेबर कोड · वेतन की परिभाषा
नए लेबर कोड के तहत वेतन की परिभाषा बदल गई है। ज्यादातर companies का मौजूदा ब्रेकअप उस परिभाषा पर खरा नहीं उतरता — और इसका सीधा असर PF, gratuity और employer cost पर पड़ता है।
काम में क्या शामिल है
फीस
फीस कर्मचारियों और ग्रेड की संख्या पर निर्भर करती है। यह एक बार का काम है, मंथली पेरोल से अलग। एम्प्लॉई मास्टर देखकर हम सही फीस पहले ही बता देते हैं।
लगभग 10 कर्मचारियों तक, एक राज्य
₹10,000 से शुरू · + GST · वन-टाइम
सही फीस काम का स्कोप देखने के बाद तय होती है
लगभग 11 से 50 कर्मचारी
₹25,000 से शुरू · + GST · वन-टाइम
सही फीस काम का स्कोप देखने के बाद तय होती है
50 से ज़्यादा employees, या कई states
₹50,000 से शुरू · + GST · one-time
Exact fee scope देखने के बाद fix होती है
इस page पर दी गयी जानकारी general information है, professional advice नहीं। Tax positions facts और उस वक़्त के law पर depend करती हैं — अपने case के लिए हमसे बात कर लीजिये।
नयी परिभाषा के तहत basic, DA और retaining allowance मिलकर total remuneration का कम से कम आधा होने चाहिए। बाक़ी allowances अगर आधे से ज़्यादा हो जाते हैं, तो जो ज़्यादा है वो वापस wages में जुड़ जाता है — चाहे आपने उसे allowance ही क्यों न लिखा हो।
Basic बढ़ता है तो PF और gratuity का base बढ़ता है — employer की cost ऊपर जाती है। और employee का अपना PF contribution भी बढ़ता है, जिससे उसका in-hand गिरता है। CTC वही रहता है, लेकिन हर चीज़ का हिसाब बदल जाता है।
क्या मिलता है
तीन चीज़ें सबसे ज़रूरी हैं: कहाँ गलत है, कितना खर्चा आएगा, और नया structure क्या हो। बाक़ी उसके आस-पास का काम है।
हर grade का breakup निकाल कर देखते हैं कि wage definition कहाँ टूटती है और कितने employees affected हैं।
Restructure करने पर employer की cost कितनी बढ़ेगी और employee का in-hand कितना गिरेगा — grade-wise, नंबर के साथ। यही वो sheet है जिसपर management decision लेता है।
ग्रेड के हिसाब से ऐसा breakup, जो कानून का पालन भी करे और employee के हाथ में जो जा सकता है उसे बचा भी ले।
Appointment letter और CTC शीट की नई भाषा, ताकि नए ऑफर्स पहले दिन से सही रहें।
एक साफ़ नोट जो HR employees को दे सके — क्या बदला, क्यों बदला, और उनके PF में क्या फायदा है। यह हिस्सा अक्सर छूट जाता है और सबसे ज़्यादा शिकायत वहीं से आती है।
नए बेस पर योगदान और gratuity लायबिलिटी का हिसाब, ताकि बजट में कोई अचानक बदलाव न आए।
ठेकेदार के ज़रिए रखे गए लोग और फिक्स्ड-टर्म employees — उनके लिए नियम अलग से देखने पड़ते हैं।
Full & final की टाइमलाइन पर भी असर पड़ा है। आपका प्रोसेस उसी हिसाब से सेट करना पड़ता है।
जो रिकॉर्ड जांच के दौरान मांगे जाते हैं, उनकी लिस्ट और फॉर्मेट — ताकि स्ट्रक्चर के साथ पेपरवर्क भी तैयार रहे।
किस पर लागू होता है
छोटा बिज़नेस हो या बड़ा — अगर सैलरी दी जाती है, तो यह सवाल आप पर लागू होता है।
यह किसी टर्नओवर या इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। पेरोल चल रहा है तो स्ट्रक्चर देखना होगा।
पुराने CTC टेम्पलेट अक्सर बेसिक 30–40% पर बने होते हैं। उन्हीं पर सबसे ज़्यादा जोखिम है।
अपने employees के साथ ठेकेदार के लोगों का भी रिकॉर्ड और ट्रीटमेंट देखना पड़ता है।
अलग-अलग राज्यों के अपने नियम और नोटिफिकेशन होते हैं — एक ही स्ट्रक्चर हर जगह फिट नहीं बैठता।
जहाँ special allowance बड़ा हिस्सा होता है, वहाँ restructuring का असर सबसे ज़्यादा दिखता है।
नये offer letters आज से compliant जाने चाहिए। बाद में बदलना दो गुना काम है और employee को बुरा लगता है।
Process
Employee master, current CTC breakup और grade structure। एक Excel से काम शुरू हो जाता है।
Before-after comparison — employer cost, in-hand और statutory contributions, grade-wise।
नया breakup, और उसके साथ letters और CTC sheet की language।
Employee communication note, और payroll में बदलाव लगाने तक support।
दिक्कत CTC में नहीं, उसके अंदर के breakup में है। Basic बढ़ने पर PF और gratuity का base बढ़ता है, इसलिए company की actual cost बढ़ जाती है और employee का in-hand घट जाता है — जबकि CTC का नंबर वही दिखता है। इसलिए पहले model बनाते हैं, फिर structure बदलते हैं।
यही सबसे ज़रूरी हिस्सा है। पैसा गुम नहीं हो रहा — वो उनके PF में जा रहा है और gratuity का हिसाब भी बेहतर हो रहा है। हम एक साफ़ note बनाते हैं जो HR employees को दे सके, ताकि बात अफ़वाह से नहीं, लिखित जवाब से चले।
हर case में नहीं। कई जगह एक revised CTC annexure और एक addendum से काम हो जाता है। क्या बनेगा ये आपके current letters की language पर depend करता है — हम देख कर बताते हैं।
Contract labour और fixed-term staff का treatment अलग होता है, और principal employer की ज़िम्मेदारी आप पर रहती है। Consultants का case अलग है लेकिन अगर वो असल में employee जैसा काम कर रहे हैं तो वो सवाल अलग से खड़ा होता है।
Gratuity का calculation basic पर चलता है, इसलिए basic बढ़ने पर liability बढ़ती है। बहुत companies के लिए ये पहला मौका होता है जब वो अपनी actual gratuity liability का नंबर देखती हैं।
Restructuring एक बार का काम है। उसके बाद हर महीने का payroll, PF, ESI और return चलते रहते हैं — वो अलग से retainer पर हो सकता है, या आप अपनी टीम से करवा सकते हैं।
और भी
एक Excel जिसमें grade और CTC breakup हो — इतने से हम बता देंगे कि structure कहाँ टूटता है और कितना काम बनता है। इसके लिए कोई charge नहीं।