तेज़। सही। बिना किसी परेशानी के।

सरकारी सब्सिडी · केंद्र और राज्य

सब्सिडी मिलती है — पर उसे मांगने का वक्त तय होता है।

ज़्यादातर लोग सब्सिडी तब पूछते हैं जब मशीन आ चुकी होती है और शेड खड़ा हो चुका होता है। उस वक्त तक ज़्यादातर स्कीम्स बंद हो चुकी होती हैं, क्योंकि उनमें पैसा खर्च करने से पहले मंज़ूरी लेनी होती है। सही तरीका है — पहले स्कीम तय करो, फिर प्रोजेक्ट बनाओ।

काम में क्या शामिल है

  • आपके काम पर कौन सी स्कीम लगती है
  • Eligibility की सही जांच
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट और DPR
  • बैंक लोन की मंज़ूरी के लिए कागज़ी कार्रवाई
  • portal पर application और फॉलो-अप
  • subsidy क्लेम और रिलीज़ तक
2,500+पूरे भारत में client
20+प्रोफेशनल्स और स्टाफ
4office — UP, दिल्ली, हरियाणा

Fees

काम और fees

नीचे प्रोफेशनल fees हैं। बैंक की प्रोसेसिंग fee, वैल्युएशन और portal के चार्जेस अलग लगते हैं। हम subsidy के परसेंटेज पर fee नहीं लेते — fee पहले तय होती है, चाहे subsidy मिले या न मिले।

पहला कदम
S1

Eligibility और scheme मैपिंग

पता करना कि कुछ बनता भी है या नहीं

  • आपकी एक्टिविटी पर लगने वाली सेंट्रल और स्टेट schemes
  • Eligibility का पॉइंट-बाय-पॉइंट चेक
  • कितना मिल सकता है, किस शक्ल में
  • लिखित नोट — आगे का रास्ता

₹5,000 से शुरू · one-time · + GST
आगे का काम लेते हैं तो ये fee उसमें एडजस्ट हो जाती है

S1 के बारे में पूछिए
S2

DPR और एप्लीकेशन

Scheme तय हो गई है

  • बैंक के format में Detailed Project Report
  • Projections, costing और viability
  • portal पर application और documents
  • query और clarification का reply

₹25,000 से शुरू · + GST
Project size और scheme के हिसाब से तय होती है

S2 के बारे में पूछिए
S3

शुरू से subsidy release तक

पूरा काम एक जगह

  • S1 और S2 का पूरा काम
  • bank के साथ co-ordination
  • inspection और site visit की तैयारी
  • claim, instalment और release का follow-up

₹50,000 से शुरू · + GST
Scope और timeline engagement letter में तय होता है

S3 के बारे में पूछिए

subsidy "मिलती" नहीं, "sanction" होती है

ज़्यादातर central schemes credit-linked हैं — मतलब पहले bank loan sanction होता है, फिर subsidy उस loan के साथ जुड़ती है। जो लोग पहले अपने पैसे से मशीन खरीद लेते हैं और बाद में subsidy मांगते हैं, उनके पास अक्सर कोई रास्ता नहीं बचता। इसलिए सबसे ज़रूरी फैसला project शुरू करने से पहले होता है, बाद में नहीं।

हर scheme का अपना दरवाज़ा है

एक ही काम पर central scheme अलग होती है और state की industrial policy अलग। कभी दोनों मिल सकती हैं, कभी एक ले ली तो दूसरी बंद हो जाती है। कौन सी जोड़ी चलती है, ये scheme के guideline में लिखा होता है — सुनने में नहीं मिलता। इसी चीज़ को पहले देख लेना पूरे project का फैसला बदल देता है।

बेसिक बात

subsidy कितने तरह की होती है

लोग "subsidy" एक ही शब्द में कह देते हैं, पर असल में पांच अलग-अलग चीज़ें हैं। इनका मिलने का तरीका, वक्त और शर्त — तीनों अलग हैं।

1. Capital subsidy

Project cost का एक हिस्सा वापस मिलता है — शेड, machinery, equipment पर। आम तौर पर बैंक लोन के साथ जुड़ी होती है और instalments में आती है, काम पूरा होने पर। यही वो सब्सिडी है जिसे लोग आम तौर पर "subsidy" कहते हैं।

2. Interest subvention

पैसा हाथ में नहीं आता — लोन का इंटरेस्ट कम हो जाता है। हर साल, जब तक repayment टाइम पर चलती रहे। एक बार चूक गए तो उस साल का फ़ायदा चला जाता है।

3. Margin money subsidy

आपको जो अपना हिस्सा लगाना होता है, उसका एक पार्ट सरकार देती है। शुरू में बैंक के पास लॉक रहता है, और कुछ साल ठीक चलने के बाद आपके लोन में adjust होता है।

4. Reimbursement

खर्चा आप करते हो, बिल के खिलाफ वापस मिलता है — जैसे स्टेट पॉलिसी में SGST, स्टैम्प ड्यूटी, बिजली ड्यूटी, या certification और trademark का खर्चा। इसके लिए बिल और प्रूफ संभाल कर रखना ही असली काम है।

5. Credit guarantee

ये पैसा नहीं है — ये बैंक को दी गयी गारंटी है, ताकि आपसे collateral कम मांगा जाए। नए यूनिट के लिए अक्सर इसी से लोन मुमकिन होता है, सब्सिडी से नहीं।

और एक चीज़ जो सब्सिडी नहीं है

ड्यूटी की छूट, टैक्स हॉलिडे या एक्सपोर्ट बेनिफिट — ये अलग कैटेगरी हैं। इनके अपने रूल्स हैं और इन्हें सब्सिडी समझ कर प्रोजेक्ट की कैलकुलेशन में डाल देना गलत पिक्चर बनाता है।

Poultry

Poultry में कब और क्या मिलता है

Poultry के लिए दो बड़े सेंट्रल रास्ते हैं। दोनों अलग चीज़ के लिए हैं — एक नए रूरल यूनिट के लिए, दूसरा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए।

NLM — रूरल poultry entrepreneurship

National Livestock Mission के तहत पैरेंट फार्म, रूरल हैचरी और ब्रूडर-कम-मदर यूनिट पर project cost का 50% कैपिटल सब्सिडी, एक यूनिट पर अधिकतम ₹25 lakh, दो बराबर instalment में। यूनिट कम से कम 1,000 पैरेंट बर्ड्स का होना चाहिए, लो-इनपुट टेक्नोलॉजी बर्ड्स के साथ।

NLM — कौन अप्लाई कर सकता है

Individual, SHG, FPO, किसान को-ऑपरेटिव, जॉइंट वेंचर, partnership firm, प्रोप्राइटरशिप, प्राइवेट company और Section 8 company। शर्त ये है कि आपके पास संबंधित ट्रेनिंग हो, या ट्रेंड एक्सपर्ट हो, या उस काम का काफी तजुर्बा हो। Application nlm.udyamimitra.in पर ऑनलाइन जाती है।

NLM में क्या कवर नहीं होता

ज़मीन की खरीद, उसका रेंट या लीज़, वर्किंग कैपिटल, और पर्सनल यूज़ की गाड़ी — इनमें से किसी पर सब्सिडी नहीं मिलती। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाते वक़्त इन्हें अलग रखना ज़रूरी है, वरना eligible cost ही गलत निकल आती है।

AHIDF — interest subvention

Animal Husbandry Infrastructure Development Fund. यह capital subsidy नहीं है — 3% सालाना interest subvention है, repayment टाइम पर होने पर, अधिकतम 8 साल तक (moratorium समेत)। Project cost का 90% तक scheduled bank से loan हो सकता है।

AHIDF — क्या cover होता है

Hatchery, layer farm, broiler breeder farm और integrated poultry project। साथ में animal feed plant और meat processing & value addition। यह poultry equipment और बड़ी capacity वाले काम के लिए बना है।

AHIDF — कौन apply कर सकता है

Individual entrepreneur, private company, MSME, FPO और Section 8 company। Government entity और co-operative society इस fund में eligible नहीं हैं। MSME ceiling के अंदर वाले project पर credit guarantee cover भी मिलता है। Portal: ahidf.udyamimitra.in

एक बात जो अभी confirm करनी ज़रूरी है

AHIDF का approved outlay 31 March 2026 तक का notify हुआ था। उसके आगे scheme किस शक्ल में चल रही है, यह आपके application के वक्त department के current order से confirm करना पड़ता है। हम यह पहले चेक करते हैं — पुरानी guideline पर project बनवा देना सबसे महंगा मशवरा होता है।

Manufacturing

Manufacturing में कब और क्या मिलता है

यहाँ central और state, दोनों तरफ से रास्ते खुलते हैं — और अक्सर state वाली policy central से ज़्यादा दे जाती है। नीचे वो हैं जो आम तौर पर काम आते हैं; exact ceiling हर scheme के current order और आपके state पर depend करती है।

PMEGP — नया micro unit

नये manufacturing या service unit के लिए margin money subsidy, KVIC के through। Rural और urban के लिए अलग rate, और SC/ST, women, ex-servicemen, PH और North-East के लिए ज़्यादा। शर्त: unit नया हो, और आपने पहले इसी scheme का फ़ायदा न लिया हो।

CLCSS — technology upgradation

मौजूदा MSE के लिए, institutional finance पर capital subsidy — पुरानी मशीन को approved नयी technology से बदलने पर। सिर्फ approved technology और approved supplier की नयी मशीन चलती है; second-hand मशीन पर नहीं मिलता।

State industrial policy

हर state अपनी policy में capital investment subsidy, SGST reimbursement, stamp duty छूट, बिजली duty छूट, और EPF reimbursement देता है। हरियाणा, UP और राजस्थान — तीनों के rate और block-wise category अलग हैं। यही सबसे ज़्यादा छूट जाती है।

Food processing — PMFME

Micro food processing unit के लिए credit-linked capital subsidy, और SHG और FPO के लिए अलग support। Poultry से जुड़ा processing, packing या value addition हो तो यह रास्ता भी देखना चाहिए।

Certification और IP का खर्चा

ZED certification, bar code, patent और trademark filing — MSME schemes में इनका खर्चा एक हद तक reimburse होता है। छोटी रक़म है, पर ये वही खर्चे हैं जो वैसे भी करने पड़ते हैं।

Credit guarantee — CGTMSE

Collateral के बिना या कम collateral पर term loan और working capital। नये unit के लिए ये अक्सर subsidy से ज़्यादा काम का होता है, क्योंकि इसी से loan sanction होता है।

Interest subsidy

Interest subsidy कब मिलती है

ये सबसे गलत समझी जाने वाली subsidy है। नीचे वो चार शर्तें हैं जो लगभग हर interest subvention scheme में मिलती हैं।

Loan bank से होना चाहिए

Scheduled bank या notified institution से लिया गया term loan। अपने पैसे से लगाया गया project, या रिश्तेदार से लिया उधार — दोनों पर interest subvention नहीं बनता, क्योंकि subvention bank के through ही pass होता है।

Repayment time पर होनी चाहिए

Subvention "prompt repayment" पर मिलती है। जिस साल instalment late हुई, उस साल का फ़ायदा आम तौर पर नहीं मिलता — और कुछ schemes में आगे के लिए भी बंद हो जाता है। EMI की तारीख यहाँ सिर्फ bank का मामला नहीं रहती।

इसकी अपनी time limit है

Subvention loan की पूरी ज़िंदगी के लिए नहीं होता। AHIDF में ये अधिकतम 8 साल तक है, moratorium समेत। इसके बाद loan normal rate पर चलता है — project की cash flow planning इसी हिसाब से करनी चाहिए।

ये account में credit होता है

पैसा आपके हाथ में cash की तरह नहीं आता। वो loan account में adjust होता है। इसलिए project की viability दिखाते वक्त उसे "income" की तरह दिखाना गलत है — वो interest cost कम करता है, बस।

Eligibility

कौन apply कर सकता है

Entity का रूप, और उस रूप पर कौन सी scheme खुलती है — ये पहले ही तय कर लेना चाहिए। एक ही project partnership में eligible हो सकता है और co-operative में नहीं।

Individual और proprietorship

ज़्यादातर schemes में eligible — PMEGP, NLM और AHIDF तीनों में। सबसे आम रास्ता यही है, पर liability और bank limit के हिसाब से आगे चल कर structure बदलना पड़ सकता है।

Partnership firm और LLP

NLM और AHIDF दोनों में eligible। State industrial policies में भी आम तौर पर शामिल। Deed में activity साफ़ लिखी होनी चाहिए, वरना eligibility पर सवाल उठता है।

Private limited company

AHIDF, CLCSS और state policies के लिए सबसे सुविधाजनक रूप। बड़े project, bank limit और investor — तीनों के लिए company ही बेहतर बैठती है।

FPO, SHG और JLG

NLM में खास तौर पर शामिल, और अक्सर उनके लिए शर्तें थोड़ी आसान होती हैं। PMFME में भी इनके लिए अलग component है।

Section 8 company और trust

NLM और AHIDF में Section 8 company eligible है। Trust और society के लिए जवाब scheme के हिसाब से बदलता है — इसलिए entity बनाने से पहले scheme देख लेना ज़्यादा समझदारी है।

कौन eligible नहीं होता

AHIDF में government entity और co-operative society नहीं। PMEGP में पहले से चल रहा unit, और वो लोग जिन्होंने पहले इसी scheme का फ़ायदा ले रखा है। Bank में default या NPA हो तो लगभग हर scheme बंद हो जाती है।

आम गलतियां

Subsidy reject होने की असली वजह

ये वो चीज़ें हैं जिनकी वजह से file वापस आती है — और इनमें से ज़्यादातर project शुरू होने से पहले ही रोक ली जा सकती हैं।

खर्चा पहले, application बाद में

Machine आ गई, shed बन गया, फिर subsidy की बात शुरू हुई। Credit-linked schemes में sanction से पहले का खर्चा आम तौर पर eligible नहीं होता।

पुरानी या second-hand machine

CLCSS जैसी schemes सिर्फ नयी, approved technology और approved supplier की machine पर चलती हैं। Second-hand machine पर subsidy नहीं बनती।

Udyam या registration ही नहीं

MSME schemes के लिए Udyam ज़रूरी है, और poultry schemes में activity का सही registration। ये छोटी चीज़ file के पहले page पर ही रुक जाती है।

DPR bank के format में नहीं

Generic project report, जिसमें projections और costing unit के हिसाब से नहीं हैं। Bank पहले इसी पर अटकता है, और bank के बिना credit-linked subsidy आगे नहीं बढ़ती।

ज़मीन और clearance का मामला

ज़मीन किसके नाम पर है, use change हुआ है या नहीं, pollution board की consent ली या नहीं। ये सब application के साथ दिखाना पड़ता है, बाद में नहीं।

एक ही खर्चे पर दो जगह claim

एक ही asset पर दो schemes का फ़ायदा लेना आम तौर पर allowed नहीं होता। Guideline में लिखा होता है कि क्या जोड़ी जा सकती है — और audit में यही सबसे पहले देखा जाता है।

Process

कैसे चलता है

1

Project समझना

क्या बनाना है, कितनी capacity, किस state में, और पैसा कहां से आ रहा है। इन्हीं चार बातों से scheme तय होती है।

2

Scheme और eligibility

सेंट्रल और स्टेट, दोनों तरफ की scheme देख कर एक लिखित नोट — क्या बनता है, कितना बनता है, और क्या नहीं बनता।

3

DPR और application

Bank के फॉर्मेट में प्रोजेक्ट रिपोर्ट, portal पर application, और query का reply। Bank के साथ बात हम करते हैं।

4

Claim और release

Sanction के बाद inspection की तैयारी, instalment का claim, और पैसा account में आने तक follow-up।

नया · Startup funding

Government grants, seed funding और 80-IAC tax exemption

DPIIT recognition, NIDHI-SSS, TIDE 2.0, MSME loans और गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र की startup schemes — हर scheme में कितना मिलता है, कौन eligible है और कितना time लगता है। सभी schemes देखिए →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Subsidy cash में मिलती है क्या?

नहीं। Capital subsidy आम तौर पर bank के थ्रू loan account में आती है, और अक्सर instalments में — काम पूरा होने पर। Interest subvention तो हाथ में आती ही नहीं, वो interest cost कम करती है। जो लोग "cash subsidy" का वादा करते हैं, उनसे दूर रहना बेहतर है।

मैंने मशीन खरीद ली है, अब कुछ बन सकता है?

ज़्यादातर credit-linked schemes में नहीं, क्योंकि वहां sanction से पहले का खर्चा eligible नहीं होता। लेकिन कुछ state policies और reimbursement वाले component commercial production की तारीख से चलते हैं, इसलिए पूरी तरह बंद मान लेना भी गलत है। Bill, payment और तारीखें देख कर ही साफ़ जवाब दिया जा सकता है।

बिना bank loan के subsidy मिल सकती है?

कुछ schemes में self-financing का रास्ता होता है — जैसे NLM में खर्चा verify होने पर instalment जारी होती है। लेकिन interest subvention बिना bank loan के बन ही नहीं सकती, क्योंकि वो loan के interest पर ही होती है।

दो schemes एक साथ ले सकते हैं?

कभी हाँ, कभी नहीं — और ये scheme के guideline में लिखा होता है। कुछ जगह एक ही प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्सों पर अलग schemes चल जाती हैं। एक ही खर्चे पर दो जगह claim आम तौर पर allowed नहीं होता और audit में पकड़ा जाता है।

कितना time लगता है?

ये department और bank, दोनों पर depend करता है, इसलिए हम कोई तारीख का वादा नहीं करते। जो हमारे हाथ में है वो ये है कि file पूरी जाए — क्योंकि file अधूरी जाने पर जो महीने बर्बाद होते हैं, वो हमेशा सबसे ज़्यादा होते हैं।

आप subsidy के percentage पर fee लेते हैं?

नहीं। Fee पहले तय होती है और लिखित में दी जाती है, चाहे subsidy sanction हो या न हो। Percentage पर काम करने वाले का interest file जल्दी भेजने में होता है, सही भेजने में नहीं।

और भी

Related services

Startup Funding & Grants

DPIIT, NIDHI-SSS, TIDE 2.0, MSME और state schemes

पोल्ट्री & हैचरी

फार्म, हैचरी और इंटीग्रेशन की compliance

मैन्युफैक्चरिंग compliance

यूनिट, जॉब वर्क और GST

वर्चुअल CFO

प्रोजेक्शन और बैंक के लिए नंबर्स

प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले एक बार पूछ लीजिए

क्या बनाना है, कितनी कैपेसिटी, किस स्टेट में — तीन बातें। इन्हीं से पता चल जाता है कि कोई स्कीम बनती है या नहीं। नहीं बनती तो हम वो भी साफ़ बता देते हैं।

WhatsApp पर बात करिए
AAarzoo से पूछिए
A
AarzooCGA इंडिया असिस्टेंट · ऑनलाइन