टैक्स audit
बिजनेस या प्रोफेशन जहाँ audit लिमिट पार हो गई हो
- बुक्स और वाउचर की चेकिंग
- Form 3CD के सभी क्लॉज
- GST, TDS और ITR से मिलान
- रिपोर्ट का ऑनलाइन अपलोड
काम का दायरा देखकर फिक्स्ड कोट
सटीक फीस काम का दायरा देखने के बाद लिखित में तय होती है
audit और एश्योरेंस · चार्टर्ड अकाउंटेंट्स
Tax audit की डेडलाइन हो, company का स्टैच्यूटरी audit हो या बैंक का स्टॉक audit — सही वर्किंग पेपर्स, समय पर रिपोर्ट और साफ़ ऑब्जर्वेशन, ताकि audit के बाद notice का डर न रहे।
काम में क्या शामिल है
फीस
audit फीस टर्नओवर, ट्रांजेक्शन की संख्या और बुक्स की हालत पर निर्भर करती है। काम का दायरा देखकर फीस पहले ही लिखित में तय कर दी जाती है।
बिजनेस या प्रोफेशन जहाँ audit लिमिट पार हो गई हो
काम का दायरा देखकर फिक्स्ड कोट
सटीक फीस काम का दायरा देखने के बाद लिखित में तय होती है
प्राइवेट लिमिटेड और OPC company
Scope देख कर fixed quote
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद लिखित में तय होती है
बढ़ते business और bank borrowers
Scope देख कर fixed quote
सटीक फीस काम का scope देखने के बाद लिखित में तय होती है
इस पेज पर दी गई जानकारी सामान्य जानकारी है, professional advice नहीं। Positions तथ्यों और उस वक्त के कानून पर निर्भर करती हैं — अपने केस के लिए हमसे बात कर लीजिए।
audit के वक्त गलतियां मिलना महंगा पड़ता है। हम पहले books, GST और TDS का reconciliation करवाते हैं, ताकि report में qualification की नौबत न आए।
Form 3CD के clauses विभाग के डेटा से मैच होते हैं। Mismatch ही आगे चलकर notice बनता है — इसलिए हर figure cross-check होता है।
Scope
Limits और rules हर साल बदल सकते हैं — अपने केस के लिए current limit हम confirm करते हैं।
Turnover ₹1 crore से ज़्यादा हो तो audit लगता है। अगर cash receipts और payments दोनों 5% के अंदर हैं तो limit ₹10 crore तक जाती है।
Doctors, architects, consultants जैसे professionals के लिए gross receipts ₹50 lakh से ज़्यादा (cash 5% के अंदर हो तो ₹75 lakh) पर audit लगता है।
Presumptive scheme में कम profit दिखाने और income limit से ऊपर होने पर भी audit लग सकता है।
हर company का audit ज़रूरी है — turnover चाहे zero हो। पहला auditor 30 दिन के अंदर board appoint करता है।
LLP का audit तब लगता है जब turnover ₹40 lakh या contribution ₹25 lakh से ज़्यादा हो।
Bank CC/OD limit के खिलाफ stock statement की verification — bank के format और timeline में।
कुछ companies के लिए mandatory, बाकी के लिए leakage और fraud पकड़ने का सबसे सस्ता तरीका।
12AB registered trusts के लिए Form 10B / 10BB audit — ITR से पहले।
State के नियमों के हिसाब से audit और registrar को filing।
ये बातें पहले से जान लीजिए
Last week में audit करवाना मतलब जल्दबाज़ी। Penalty turnover का 0.5% (max ₹1.5 lakh) तक हो सकती है।
GSTR-3B, GSTR-1 और books में फर्क audit report में दिखता है — पहले reconcile करिए।
₹10,000 से ज़्यादा कैश खर्च और ₹20,000 से ज़्यादा कैश लोन की जानकारी अलग से रिपोर्ट की जाती है।
प्रक्रिया
टर्नओवर और एंटिटी देखकर कौन सा audit कब तक होगा — इसकी लिखित जानकारी।
बुक्स, बैंक स्टेटमेंट्स, GST और TDS डेटा एक चेकलिस्ट के हिसाब से।
टेस्टिंग, रिकॉन्सिलिएशन और सवाल-जवाब — आपके साथ बैठकर।
साइन की हुई रिपोर्ट, UDIN और portal पर अपलोड, डेडलाइन से पहले।
दस्तावेज़
audit के लिए: यह लिस्ट तैयार रखिए। फोटो या स्कैन WhatsApp पर भेज दीजिए — ओरिजिनल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर। केस के हिसाब से लिस्ट थोड़ी बदल सकती है।
आमतौर पर tax audit report assessment year की 30 September तक अपलोड करनी होती है, और ITR 31 October तक। सरकार कभी-कभी तारीख बढ़ाती है — हम ताज़ा तारीख कन्फर्म करते हैं।
अगर आप presumptive scheme में हैं और उससे कम प्रॉफिट दिखाते हैं और इनकम बेसिक लिमिट से ऊपर है, तो audit लग सकता है। केस देखकर बताते हैं।
हाँ। Companies Act के तहत हर company का statutory audit और annual filing ज़रूरी है, चाहे बिज़नेस हो या न हो।
कुछ स्थितियों में revised report अपलोड की जा सकती है। पहले गलती की वजह देखते हैं, फिर रास्ता बताते हैं।
यह स्टॉक की जगह और सामान पर निर्भर करता है, ज़्यादातर मामलों में कुछ दिन लगते हैं। बैंक की डेडलाइन देखकर प्लान करते हैं।
और भी
बिज़नेस का प्रकार और पिछले साल का टर्नओवर भेजिए — हम बताएंगे कौन सा audit लगेगा और कब तक क्या चाहिए। इसके लिए कोई चार्ज नहीं है।