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लीगल · एडवोकेट्स

notice सही हो तो आधा केस वहीं तय हो जाता है।

लीगल notice आपकी बात लिखित में, सही कानून के साथ सामने वाले तक पहुँचाता है — और कई बार केस कोर्ट तक जाने से पहले ही सुलझ जाता है। आए हुए notice का रिप्लाई भी उतना ही ज़रूरी है।

काम में क्या शामिल है

  • तथ्यों और दस्तावेजों का रिव्यू
  • notice का ड्राफ्ट — सही कानून और मांग
  • रजिस्टर्ड पोस्ट / email से भेजना
  • आए हुए notice का रिप्लाई
  • सेटलमेंट की बातचीत
  • जरूरत पड़ने पर अगला कानूनी कदम
2,500+पूरे भारत में client
20+प्रोफेशनल्स और स्टाफ
CA · CS · CMA · Advocateएक ही फर्म में

काम

हम क्या संभालते हैं

फीस मामले के प्रकार और दस्तावेजों पर निर्भर करती है — काम शुरू होने से पहले लिखित में बता दी जाती है।

LN1

notice ड्राफ्टिंग

आप notice भेजना चाहते हैं

  • तथ्यों और दस्तावेजों का रिव्यू
  • ड्राफ्ट आपकी मंजूरी के लिए
  • एडवोकेट के लेटरहेड पर
  • रजिस्टर्ड पोस्ट / email से भेजना

काम का दायरा देखकर फिक्स्ड कोट
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

LN1 के बारे में पूछिए
LN2

notice का जवाब

आपको notice मिला है

  • notice के हर पॉइंट का विश्लेषण
  • तथ्यों के साथ reply
  • समय सीमा के अंदर भेजना
  • आगे के रिस्क की जानकारी

काम का दायरा देखकर फिक्स्ड फीस
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

LN2 के बारे में पूछिए
LN3

notice + फॉलो-अप

जहाँ सेटलमेंट या केस की संभावना हो

  • notice या reply
  • दूसरी पार्टी से बातचीत
  • सेटलमेंट एग्रीमेंट का ड्राफ्ट
  • केस filing की तैयारी

काम का दायरा देखकर फिक्स्ड फीस
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

LN3 के बारे में पूछिए

Bar Council of India के नियमों के अनुसार यह पेज सिर्फ जानकारी के लिए है; इसे विज्ञापन या विज्ञापन का प्रयास न समझा जाए। हर मामले के तथ्य अलग होते हैं — किसी भी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

लिखित रिकॉर्ड

notice एक औपचारिक रिकॉर्ड बनाता है कि आपने मांग की थी। कोर्ट में यह दिखाता है कि आपने पहले सुलझाने की कोशिश की।

reply न देना गलती है

आए हुए notice को इग्नोर करना आगे केस में आपके खिलाफ जा सकता है। सोच-समझकर दिया गया reply आपका पक्ष साफ करता है।

दायरा

किन मामलों में notice

सिविल, कमर्शियल और वैधानिक मामले।

पैसे की रिकवरी

उधार, अनपेड invoice या एडवांस वापस लेना।

Cheque bounce

NI Act की Section 138 के तहत — 30 दिन के अंदर notice।

प्रॉपर्टी और किराया

किराया, खाली करवाना, पजेशन या बाउंड्री का विवाद।

कंज्यूमर शिकायतें

खराब प्रोडक्ट या सर्विस — company को notice।

रोजगार

Salary बकाया, टर्मिनेशन या नॉन-कंपीट।

बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट

कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन, सप्लाई या सर्विस विवाद।

बिल्डर विवाद

पजेशन में देरी और refund।

मानहानि

गलत आरोप या ऑनलाइन पोस्ट।

Partnership विवाद

partner के बीच हिसाब और एग्जिट।

ये बातें पहले से जान लीजिए

notice भेजने से पहले

Documents तैयार रखिए

Agreement, invoice, चैट, बैंक एंट्री — notice इन्हीं पर टिकता है।

समय सीमा

Cheque bounce जैसे मामलों में notice की सख्त समय सीमा है।

डिमांड वाजिब हो

ज़्यादा डिमांड notice को कमज़ोर और सेटलमेंट को मुश्किल बनाती है।

प्रक्रिया

यह कैसे काम करता है

1

समझना

तथ्य, दस्तावेज़ और आपका उद्देश्य।

2

ड्राफ्ट

notice या जवाब का ड्राफ्ट — आपके रिव्यू के साथ।

3

भेजना

रजिस्टर्ड पोस्ट / कूरियर / email से, रिकॉर्ड के साथ।

4

फॉलो-अप

जवाब का विश्लेषण और अगला कदम।

दस्तावेज़

कौन से दस्तावेज़ चाहिए

कानूनी notice के लिए: यह लिस्ट तैयार रखिए। फोटो या स्कैन WhatsApp पर भेज दीजिए — ओरिजिनल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर। केस के हिसाब से लिस्ट थोड़ी बदल सकती है।

आपकी तरफ से

  • मामले की छोटी सी लिखित समरी
  • आपका ID प्रूफ

सबूत

  • एग्रीमेंट, invoice या रसीदें
  • पेमेंट प्रूफ (बैंक स्टेटमेंट)
  • email, WhatsApp चैट और पिछले पत्र
  • दूसरी पार्टी का पूरा नाम और पता

दस्तावेज़ WhatsApp पर भेजिए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कानूनी notice का जवाब कितने दिन में देना होता है?

notice में आम तौर पर 15 या 30 दिन दिए जाते हैं। reply समय पर देना बेहतर है, चाहे बातचीत चल रही हो।

क्या लीगल notice भेजना ज़रूरी है?

कुछ मामलों में कानून notice को ज़रूरी बनाता है — जैसे चेक बाउंस और सरकार के खिलाफ कुछ केस। बाकी मामलों में यह सेटलमेंट का एक अच्छा पहला कदम है।

क्या notice WhatsApp या email पर भेजा जा सकता है?

email और WhatsApp से भी भेजा जाता है, लेकिन रजिस्टर्ड पोस्ट का सबूत अक्सर सबसे मज़बूत माना जाता है। हम दोनों तरीके इस्तेमाल करते हैं।

notice के बाद क्या केस करना पड़ेगा?

ज़रूरी नहीं। कई मामले notice के बाद ही सुलझ जाते हैं। अगर न सुलझें तो केस का विकल्प रहता है।

क्या रिज़ल्ट की गारंटी है?

नहीं। हम तथ्यों और कानून के हिसाब से आपकी स्थिति साफ बताते हैं।

और भी

संबंधित सेवाएँ

चेक बाउंस

Section 138 NI Act

सिविल मुकदमेबाजी

रिकवरी और सिविल सूट

एग्रीमेंट ड्राफ्टिंग

विवाद से पहले सही एग्रीमेंट

अपना मामला बताइए

छोटा सा विवरण और डॉक्यूमेंट्स — टीम देखकर आपसे बात करेगी।

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AarzooCGA इंडिया सहायक · ऑनलाइन