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सिविल लिटिगेशन · एडवोकेट्स

सिविल विवाद — सही फोरम, सही राहत, सही समय।

रिकवरी हो, प्रॉपर्टी का झगड़ा हो या बिज़नेस कॉन्ट्रैक्ट — सिविल केस में सबसे ज़रूरी है सही कोर्ट, सही राहत और लिमिटेशन के अंदर filing। प्लीडिंग्स से लेकर बहस तक, डॉक्यूमेंट्स और अकाउंट्स की समझ के साथ।

काम में क्या शामिल है

  • केस की जांच और समय सीमा
  • Plaint या लिखित जवाब
  • इंजंक्शन और अंतरिम राहत
  • सबूत और क्रॉस-एग्जामिनेशन
  • बहस और अंतिम सुनवाई
  • Execution और रिकवरी
2,500+पूरे भारत में client
20+प्रोफेशनल और स्टाफ
CA · CS · CMA · Advocateएक ही फर्म में

काम

हम क्या संभालते हैं

फीस कोर्ट, स्टेज और सुनवाई पर निर्भर करती है — काम शुरू होने से पहले लिखित में तय होती है।

CV1

रिकवरी सूट

पैसा, invoice या एडवांस

  • दस्तावेज़ और समय सीमा की जाँच
  • समरी या रेगुलर सूट
  • कमर्शियल कोर्ट जहाँ लागू हो
  • डिक्री और निष्पादन

काम का दायरा देखकर तय कीमत
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CV1 के बारे में पूछिए
CV2

प्रॉपर्टी के मामले

टाइटल, कब्ज़ा, बँवारा, किराया

  • टाइटल डॉक्युमेंट्स का रिव्यू
  • इंजंक्शन एप्लीकेशन
  • बंटवारे और कब्जे के मुकदमे
  • रेवेन्यू और सिविल फोरम

काम का स्कोप देखकर फिक्स्ड फीस
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CV2 के बारे में पूछिए
CV3

डिफेंस

आपके खिलाफ मुकदमा

  • समन और वाद का विश्लेषण
  • रिटन स्टेटमेंट समय पर
  • जहां जरूरी हो वहां काउंटर-क्लेम
  • सेटलमेंट और मेडिएशन

काम का स्कोप देखकर फिक्स्ड फीस
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CV3 के बारे में पूछिए

Bar Council of India के नियमों के अनुसार यह पेज सिर्फ जानकारी के लिए है; इसे विज्ञापन या सोलिसिटेशन न समझा जाए। हर मामले के तथ्य अलग होते हैं — किसी भी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

समय सीमा का ध्यान

ज्यादातर सिविल दावों के लिए 3 साल की समय सीमा होती है। देरी से हक खत्म हो सकता है — इसलिए तारीखों का ध्यान रखें।

अकाउंट्स समझने वाले एडवोकेट्स

रिकवरी और कमर्शियल केस में हिसाब ही सबूत है। CA टीम साथ होने से क्लेम और लेजर मजबूत बनते हैं।

स्कोप

कौन से सिविल मामले

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, कमर्शियल कोर्ट, कंज्यूमर कमीशन और ट्रिब्यूनल — दिल्ली (रोहिणी) और हरियाणा।

पैसे की रिकवरी

बकाया invoice, लोन और एडवांस — Order 37 समरी सूट भी।

कमर्शियल विवाद

तय वैल्यू के कमर्शियल विवाद — प्री-इंस्टीट्यूशन मीडिएशन के साथ।

प्रॉपर्टी का मालिकाना हक

ओनरशिप और पजेशन का डिक्लेरेशन।

बंटवारा

पारिवारिक प्रॉपर्टी का बंटवारा।

इंजंक्शन

कंस्ट्रक्शन, ट्रांसफर या इस्तेमाल रोकने के लिए।

किराया और बेदखली

किरायेदार और मकान मालिक के विवाद।

कंज्यूमर केस

डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल कमीशन।

पारिवारिक मामले

मेंटेनेंस, कस्टडी और तलाक (आपसी और विवादित)।

एग्जीक्यूशन

डिक्री के बाद असली रिकवरी।

ये बातें पहले से जान लीजिए

केस से पहले

प्री-लिटिगेशन मीडिएशन

कमर्शियल विवादों में बिना किसी अर्जेंट रिलीफ के, केस से पहले मीडिएशन जरूरी है।

कोर्ट फीस

रिकवरी और प्रॉपर्टी सूट में कोर्ट फीस क्लेम वैल्यू पर लगती है — स्टेट के हिसाब से।

समझौता

लोक अदालत और मीडिएशन से कई केस जल्दी सुलझते हैं — हम यह विकल्प हमेशा देखते हैं।

प्रक्रिया

कैसे चलता है

1

असेसमेंट

तथ्य, दस्तावेज और समय सीमा।

2

रणनीति

notice, मीडिएशन या सीधा मुकदमा।

3

प्लीडिंग्स

वाद पत्र / लिखित बयान और आवेदन।

4

ट्रायल

सबूत, बहस और डिक्री।

दस्तावेज

कौन से दस्तावेज चाहिए

सिविल केस के लिए: यह लिस्ट तैयार रखिए। फोटो या स्कैन WhatsApp पर भेज दीजिए — ओरिजिनल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर। केस के हिसाब से लिस्ट थोड़ी बदल सकती है।

दस्तावेज

  • एग्रीमेंट, टाइटल डीड या जो भी मामले का आधार है
  • पेमेंट प्रूफ और बैंक स्टेटमेंट
  • पत्र, email और चैट
  • पिछले notice और जवाब

केस के लिए

  • आपका आईडी और एड्रेस प्रूफ
  • वकालतनामा (हम देते हैं)
  • आपके खिलाफ केस हो तो समन और वाद पत्र की कॉपी

दस्तावेज WhatsApp पर भेजिए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Civil case में कितना समय लगता है?

यह कोर्ट और केस के प्रकार पर निर्भर करता है — कुछ महीनों से लेकर कई साल तक। Summary suits और mediation से समय कम हो सकता है।

क्या हर केस में कोर्ट जाना पड़ेगा?

नहीं। आपकी ज़्यादातर तारीखों पर Advocate ही पेश होते हैं; आपकी ज़रूरत सिर्फ सबूत के समय होती है।

रिकवरी के लिए कौन सा रास्ता सबसे अच्छा है?

अगर लिखित एग्रीमेंट, invoice और रसीद हो तो summary suit एक तेज़ रास्ता है। चेक के मामले में Section 138 भी किया जा सकता है।

क्या आप दिल्ली के बाहर के केस लेते हैं?

दिल्ली और हरियाणा के कोर्ट में; बाकी जगहों पर सहयोगी वकीलों के साथ।

क्या नतीजे की कोई गारंटी है?

नहीं। हम आपके केस की मज़बूती और जोखिम दोनों के बारे में साफ़ बताते हैं।

और भी

संबंधित सेवाएँ

Legal notice

केस की शुरुआत का पहला कदम

प्रॉपर्टी से जुड़े कानूनी मामले

टाइटल और कागज़ात की जाँच

टैक्स से जुड़े कानूनी विवाद

टैक्स appeal

अपना मामला बताइये

विवाद का विवरण और दस्तावेज़ भेजें — हमारी टीम इन्हें देखकर आपसे बात करेगी।

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AarzooCGA India असिस्टेंट · ऑनलाइन