तेज़। सटीक। बिना किसी परेशानी के।

क्रिमिनल लॉ · एडवोकेट्स

क्रिमिनल मामले में पहले 48 घंटे सबसे ज़रूरी हैं।

FIR, notice या गिरफ्तारी का डर — क्रिमिनल मामले में हर कदम सोच-समझकर उठाना होता है। Bail, quashing और ट्रायल डिफेंस के साथ-साथ फाइनेंशियल और इकोनॉमिक अपराधों में CA टीम का सपोर्ट।

काम में क्या शामिल है

  • FIR या शिकायत का विश्लेषण
  • अग्रिम जमानत
  • नियमित जमानत
  • FIR / शिकायत रद्द करवाना
  • Trial में बचाव
  • शिकायत ड्राफ्टिंग और filing
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CA · CS · CMA · Advocateएक ही फर्म में

काम

हम क्या संभालते हैं

फीस कोर्ट, स्टेज और मामले की गंभीरता पर निर्भर करती है — काम शुरू होने से पहले लिखित में तय होती है।

CR1

जमानत

गिरफ्तारी का डर या गिरफ्तारी हो गई

  • FIR और धाराओं का विश्लेषण
  • अग्रिम या नियमित जमानत अर्जी
  • Sessions Court / High Court
  • जमानत की शर्तों का पालन

काम का दायरा देखकर तय फीस
फोरम, स्टेज और सुनवाई के हिसाब से — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CR1 के बारे में पूछिए
CR2

क्वैशिंग

झूठी या सिविल प्रकृति की FIR

  • तथ्यों और दस्तावेज़ों की समीक्षा
  • High Court में quashing petition
  • जहाँ लागू हो, समझौते के आधार पर quashing
  • अंतरिम राहत

काम के हिसाब से फिक्स्ड फीस
Forum, स्टेज और सुनवाई के आधार पर — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CR2 के बारे में पूछिए
CR3

ट्रायल / शिकायत

केस चल रहा है या शिकायत करनी है

  • शिकायत की ड्राफ्टिंग और filing
  • आरोप और सबूतों की स्टेज
  • गवाहों से पूछताछ
  • अंतिम बहस

काम के हिसाब से फिक्स्ड फीस
Forum, स्टेज और सुनवाई के आधार पर — काम शुरू होने से पहले लिखित में

CR3 के बारे में पूछिए

Bar Council of India के नियमों के अनुसार यह पेज सिर्फ जानकारी के लिए है; इसे विज्ञापन या प्रलोभन न समझा जाए। हर मामले के तथ्य अलग होते हैं — किसी भी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

नए आपराधिक कानून

1 July 2024 से IPC की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), CrPC की जगह BNSS और Evidence Act की जगह BSA लागू हैं। नई FIR इन्हीं में दर्ज होती हैं।

वित्तीय मामलों में आंकड़ों का महत्व

धोखाधड़ी, अमानत में खयानत या GST और टैक्स अपराधों में हिसाब-किताब ही बचाव है — CA टीम इसमें मदद करती है।

कार्यक्षेत्र

कौन से मामले

दिल्ली (रोहिणी) और हरियाणा की अदालतें; ज़रूरत के हिसाब से High Court के मामले।

अग्रिम जमानत

गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा — BNSS की Section 482.

नियमित जमानत

गिरफ्तारी के बाद जमानत — magistrate, sessions या High Court.

FIR रद्द करवाना

FIR या कानूनी कार्यवाही को High Court में चुनौती — BNSS की Section 528.

धोखाधड़ी और जालसाजी

बिजनेस और निवेश से जुड़ी शिकायतें।

वैवाहिक मामले

दहेज और प्रताड़ना से जुड़े मामले।

Cheque bounce

Section 138 NI Act — शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों के लिए।

आर्थिक अपराध

GST, customs और टैक्स से जुड़ी कानूनी कार्यवाही।

पुलिस शिकायतें

FIR registration और magistrate के पास शिकायत।

appeal और revision

सजा या आदेश के खिलाफ।

ये बातें पहले से जान लीजिए

जरूरी बातें

बयान सोच-समझकर दें

पुलिस या किसी को भी बयान देने से पहले वकील से बात करें।

notice इग्नोर मत करिए

पुलिस notice पर हाजिर होना और सहयोग करना आपके जमानत के केस को मजबूत करता है।

दस्तावेज संभाल कर रखें

चैट्स, पेमेंट्स और एग्रीमेंट्स — बचाव का सबसे बड़ा हिस्सा।

प्रक्रिया

यह कैसे काम करता है

1

तुरंत रिव्यू

FIR, धाराएं और रिस्क।

2

सुरक्षा

बेल या अंतरिम सुरक्षा।

3

रणनीति

Quashing, सेटलमेंट या ट्रायल।

4

कोर्ट में पक्ष रखना

हर तारीख पर, फाइनल ऑर्डर तक।

डॉक्यूमेंट्स

कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए

क्रिमिनल मामले के लिए: यह लिस्ट तैयार रखिए। फोटो या स्कैन WhatsApp पर भेज दीजिए — ओरिजिनल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर। केस के हिसाब से लिस्ट थोड़ी बदल सकती है।

केस के कागजात

  • FIR या शिकायत की कॉपी
  • पुलिस notice (अगर आया है)
  • पिछले कोर्ट ऑर्डर (बेल आदि)

की तरफ से

  • मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट्स — चैट्स, पेमेंट्स, एग्रीमेंट्स
  • ID और एड्रेस प्रूफ
  • वकालतनामा (हम देते हैं)

डॉक्यूमेंट्स WhatsApp पर भेजिए

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एंटीसिपेटरी बेल कब फाइल करनी चाहिए?

जब आपको लगता है कि किसी गैर-जमानती अपराध में गिरफ्तारी हो सकती है — जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर है।

FIR रद्द कैसे होती है?

High Court अपनी शक्तियों का उपयोग करके FIR रद्द कर सकता है, जैसे जब आरोपों से कोई अपराध नहीं बनता, मामला सिविल प्रकृति का हो, या कुछ अपराधों में पक्षों के बीच समझौता हो गया हो।

IPC और BNS में क्या फर्क है?

1 July 2024 से नए मामले BNS में दर्ज होते हैं। उससे पहले के अपराध पुराने कानून के तहत चलते रहते हैं।

क्या आप जरूरी मामले वीकेंड पर भी देखते हैं?

जरूरी मामलों के लिए WhatsApp पर लिखें — टीम जल्द से जल्द आपसे संपर्क करेगी।

क्या परिणाम की कोई गारंटी है?

नहीं। हम आपके केस के तथ्यों और कानून के आधार पर स्पष्ट सलाह देते हैं।

और भी

संबंधित सेवाएं

चेक बाउंस

Section 138 के मामले

सिविल मुकदमेबाजी

सिविल उपचार

GST notice SOS

GST के मामले

क्या कोई जरूरी मामला है?

WhatsApp पर FIR नंबर और पुलिस स्टेशन का नाम लिखें — टीम जल्द से जल्द आपसे संपर्क करेगी।

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AarzooCGA इंडिया असिस्टेंट · ऑनलाइन