Bank stock audit
CC/OD limit वाले business
- फिजिकल वेरिफिकेशन
- Stock statement से मिलान
- Drawing power रिपोर्ट
- Bank के फॉर्मेट में रिपोर्ट
स्कोप देखकर फिक्स्ड कोट
सटीक फीस काम का स्कोप देखने के बाद लिखित में तय होती है
CMA · Stock audit
Bank cash credit limit के खिलाफ stock और debtors का audit करवाता है, statutory auditor CARO के तहत physical verification और bank statements का मिलान देखता है, और management को पता होना चाहिए कि असल में कितना माल किस वैल्यू का है। Cost Accountant के रूप में हम stock audit, valuation और control — तीनों करते हैं।
काम में क्या शामिल है
Fees
Fee locations की संख्या, items की variety और report के format पर depend करती है।
CC/OD limit वाले business
स्कोप देखकर फिक्स्ड कोट
सटीक फीस काम का स्कोप देखने के बाद लिखित में तय होती है
Statutory audit के साथ
स्कोप देखकर फिक्स्ड कोट
सटीक फीस काम का स्कोप देखने के बाद लिखित में तय होती है
मैन्युफैक्चरर्स
स्कोप देखकर फिक्स्ड कोट
काम का स्कोप देखने के बाद ही फीस लिखित में तय की जाती है
इस पेज पर दी गई जानकारी सामान्य सूचना है, प्रोफेशनल सलाह नहीं। नियम और कानून समय के साथ बदल सकते हैं — अपने केस के लिए हमसे बात कर लीजिए।
Valuation सिर्फ गिनती नहीं — लागत, NRV और वेस्टेज की समझ CMA का काम है।
जो आंकड़े बैंक को जाते हैं वही statutory audit में — दोनों एक ही टीम देखती है।
स्कोप
बैंक, auditor और अपने कंट्रोल के लिए — स्कोप अलग, तरीका वही।
बैंक के फॉर्मेट में स्टॉक, debtors, creditors और DP की रिपोर्ट।
Statutory audit के लिए गिनती, सैंपलिंग और मिलान।
लागत का फॉर्मूला (FIFO / weighted average), NRV टेस्ट और प्रोविज़न।
प्रति यूनिट लागत, वेस्टेज और ओवरहेड्स का बंटवारा।
री-ऑर्डर लेवल, ABC एनालिसिस और समय-समय पर गिनती का सिस्टम।
मैनेजमेंट के लिए मंथली या क्वार्टरली स्टॉक चेक।
कानून क्या कहता है
Stock audit सिर्फ बैंक की औपचारिकता नहीं — यही आंकड़े statutory audit, CARO रिपोर्ट और इनकम टैक्स में भी जाते हैं।
Inventory की value, cost या net realisable value में से जो भी कम हो, उस पर तय होती है।
Income-tax के लिए inventory valuation के अपने नियम हैं; इसमें cost में taxes और duties का हिसाब देखा जाता है।
Statutory auditor को physical verification करना होता है और 10% या उससे ज्यादा की गड़बड़ी (discrepancy) रिपोर्ट करनी होती है।
₹5 crore से ज्यादा working capital limit (current assets पर secured) होने पर, bank को दिए गए quarterly statements और books का मिलान auditor रिपोर्ट करता है।
तय की गई industries और turnover limit के आधार पर cost records रखना और cost audit कराना जरूरी है।
ये बातें पहले से जान लीजिए
हर महीने अंदाज़ा लगाकर stock statement देना — audit में बड़ा अंतर निकलता है और DP में कटौती हो जाती है।
सालों से पड़ा slow-moving stock पुरानी cost पर दिखाना — इससे profit और DP दोनों बढ़े हुए दिखते हैं।
कई locations होने पर भी एक ही total दिखाना — verification में मिलान करना मुश्किल होता है।
दूसरे के पास पड़ा अपना माल या अपने पास पड़ा दूसरे का माल — record में अलग-अलग न होना।
90 दिन से पुराने debtors DP में गिने नहीं जाते, पर statement में दिखाएं।
CGA का प्रोसेस
Locations, items और कट-ऑफ डेट तय।
Stock register, bank statements और sanction की शर्तें।
Godown पर फिजिकल काउंट और सैंपलिंग।
Cost और NRV, slow-moving और डैमेज्ड स्टॉक का ट्रीटमेंट।
अंतर, DP का कैलकुलेशन और सुधार के सुझाव।
डॉक्यूमेंट्स
यह लिस्ट तैयार रखिए। फोटो या स्कैन WhatsApp पर भेज दीजिए — ओरिजिनल सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर। केस के हिसाब से लिस्ट थोड़ी बदल सकती है।
ज़रूरी
Bank की stock audit रिपोर्ट सीधा आपकी drawing power और account की classification पर असर डालती है। audit से पहले stock statement और books का खुद मिलान कर लीजिए।
Bank द्वारा नियुक्त auditor bank के लिए काम करता है। हम आपकी तरफ से pre-audit review और bank के जवाब तैयार करते हैं, या bank के पैनल पर नियुक्त होने पर स्वतंत्र audit करते हैं।
Cash credit या overdraft limit stock और debtors के बदले मिलती है। Bank चेक करता है कि statement में दिखाया गया stock असल में मौजूद है और सही वैल्यू पर है, ताकि drawing power सही रहे।
Eligible stock और debtors की वैल्यू में से मार्जिन और creditors घटाकर। 90 दिन से पुराने debtors और बेकार stock आमतौर पर गिने नहीं जाते — शर्तें sanction letter में दी होती हैं।
Cost या net realisable value, जो भी कम हो। Cost में खरीद की कीमत, माल ढुलाई और बनाने का खर्च आता है; वापस मिलने वाले टैक्स नहीं। Income-tax के लिए ICDS II के नियम भी देखने होते हैं।
पहले कारण ढूंढते हैं — जैसे एंट्री की गलती, cut-off, job work या wastage। फिर books में सही सुधार और ज़रूरत हो तो bank को संशोधित statement देते हैं।
और भी
Stock कितनी जगह है, कौनसा आइटम है और audit किस काम के लिए चाहिए — बैंक, statutory audit या internal control। हम स्कोप और फीस बता देंगे।